जब कुरैश अपनी बात - चीत में असफल हो गए और अबू तालिब को इस बात पर सन्तुष्ट न कर सके कि वह मोहम्मद को रोकें और अल्लाह की ओर दावत देने से बाज़ रखें , तो उन्होंने एक ऐसा रास्ता अपनाने का फैसला किया , जिस पर चलने से वह अब तक कतराते रहे थे और जिसके अंजाम और नतीजों के डर से उन्होंने दूर रहना ही उचित समझा था और वह रास्ता था मोहम्मद की ज़ात पर जुल्म व सितम ढाने का रास्ता । मोहम्मद पर जुल्म व सितम इसलिए कुरैश ने अन्तत : वे सीमाएं तोड़ दी जिन्हे दावत शुरू होने के दिनों से अब तक वे महान समझते थे और जिनका सम्मान करते आ रहे थे । वास्तव में कुरैश की अकड़ और अभिमान पर यह बात बड़ी गरां गुज़र रही थी कि वे लम्बे समय तक सब्र करें । इसलिए वे अब तक हंसी , ठठे , उपहास और खिल्ली और सच्चाई से नज़रें चुराने या उसे तोड़ - मरोड़ कर बिगाड़ने का जो काम करते आ रहे थे , उससे एक कदम आगे बढ़कर मोहम्मद की तरफ़ जुल्म व सितम का हाथ भी बढ़ा दिया और यह बिल्कुल स्वाभाविक था कि इस काम में आपका चचा अबू लहब (मोहम्मद का सगा चाचा) सबसे आगे हो , क्योंकि वह बनू हाशिम एक सरदार था । उसे वह खतरा न था जो औरों को था और वह इस्लाम और मुसलमानों का कट्टर दुश्मन था ।मोहम्मद के बारे में उसकी रीति पहले दिन ही से , जबकि करैश ने इस तरह की बात अभी सोची भी न थी , यही थी । उसने बनू हाशिम की सभा में कछ किया , फिर कोहे सफ्रा पर जो हरकत की उसका उल्लेख पिछले पन्नों में आ चुका है । आपके नबी बनाए जाने से पहले अबू लहब (मोहम्मद का सगा चाचा) ने अपने दो बेटों उत्वा और उतैबा का विवाह मोहम्मद की दो बेटियों रुकैया और उम्मे कुलसूम से किया था लेकिन नबी बनाए जाने के बाद उसने बड़ी ही सख्ती और कड़ाई से इन दोनों को तलाक़ दिलवा दी ।
सुनाया ' हमने मुज़म्मम ' की अवज्ञा की , उसकी बात नहीं मानी और उसके दीन को घृणा और तिरस्कार के साथ छोड़ दिया । ' इसके बाद वापस चली गई ।
अबूबक्र रज़िक ने कहा , ऐ मोहम्मद ! क्या उसने आपको देखा नहीं ? आपने फ़रमाया , नहीं ! उसने मुझे नहीं देखा। अबूबक्र बज़्ज़ार ने भी इस घटना का उल्लेख किया है और उसमें इतना बढ़ा दिया है कि जब वह अबूबक्र के पास खड़ी हुई थी तो उसने यह भी कहा , ' अबूबक्र ! तुम्हारे साथी ने हमारी निन्दा की है ? ' अबूबक्र ने कहा , ' नहीं , इस इमारत के रब की क़सम ! न वह कविता कहते हैं , न उसे जुबान पर लाते हैं । ' उसने कहा , तुम सच कहते हो ।
No comments:
Post a Comment